1. तूफ़ान में है कश्ती, और दूर किनारे हैं ! यादें हैं तेरी, बाक़ी हम जिनके सहारे हैं ! तुम जब से गये हमदम , ऐसा हमें लगता है हम जीत के भी सब कुछ , इस मोड़ पे हारे हैं !! 2. जिंदगानी के शब्-ओ-रोज़ , किये हैं भारी ! हाथ में आई हुई थी जो, वो बाज़ी हारी !! हम सा नादान ज़माने में भला होगा कोई ? हमने खुद अपने ही पाँव पे कुल्हाड़ी मारी !! 3. हमने कोशिश हज़ार की लेकिन , दिल को आया नहीं सुकूँ अब तक ! दिल सुकूँ पायेगा ये जब की बात हश्र दिल का मैं क्या करूँ तब तक ?? 4. हमने एक बुत को, मोहब्बत में, खुदा समझा था ! और फिर उसकी जफ़ाओं को, वफ़ा समझा था !! चार दिन खेल के, एक रोज़ इसे तोड़ गया ; दिल-ए-मासूम को, उस शख्स ने क्या समझा था ?? 5. वफ़ा की आग न लग पाई जब लगाने से ! तो फिर बुझेगी भला किस तरह बुझाने से ? मोहब्बतें हुआ करती हैं ज़िन्दा -ओ -जावेद (immortal) न मिट सकेगी मोहब्ब...