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Showing posts from October, 2012

पगली कविता

मेरी कविताएँ पगली हैं ये हैं बिल्कुल सपनीली सी ! इन में   जो    बातें    हैं    न    जी   ये    सब    हैं   ' ख़ाली - पीली ' सी !! माना ये दुनिया ज़ालिम है , और इसकी हवा ज़हरीली सी !! हैं लोग बड़े ही सर्द - मुहर , बातें उनकी बर्फ़ीली सी !! पर दुःख    के    आँसू ,  काहे को ? आँखें   मत    रक्खो    गीली    सी ! जो    होना    है    सो    होएगा आँखें   रक्खो    सपनीली    सी !! ऐसी    ही    काली काली    सी ऐसी   ही    गहरी ,  नशीली    सी !! -- जावेद '' साहिर ''