मेरी कविताएँ पगली हैं ये हैं बिल्कुल सपनीली सी ! इन में जो बातें हैं न जी ये सब हैं ' ख़ाली - पीली ' सी !! माना ये दुनिया ज़ालिम है , और इसकी हवा ज़हरीली सी !! हैं लोग बड़े ही सर्द - मुहर , बातें उनकी बर्फ़ीली सी !! पर दुःख के आँसू , काहे को ? आँखें मत रक्खो गीली सी ! जो होना है सो होएगा आँखें रक्खो सपनीली सी !! ऐसी ही काली काली सी ऐसी ही गहरी , नशीली सी !! -- जावेद '' साहिर ''
The blog has a collection of beautiful gems from Urdu, English and Hindi poetry. It also contains a few scribbles and musings of mine.