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कुत्ते

यह गलियों के आवारा, बेकार कुत्ते! कि बख्शा गया (bestowed with) जिनको शौक-ए-गदाई (the art of begging)!! ज़माने की फिटकार (reprimands) सरमाया (wealth) उनका, जहाँ भर की दुत्कार उनकी कमाई!! न आराम शब् को , न राहत सवेरे , गिलाज़त ( dirt) में घर, नालियों में बसेरे! जो बिगड़ें तो एक दूसरे से लड़ा दो ! ज़रा एक रोटी का टुकड़ा दिखा दो! यह हर एक की ठोकरें खाने वाले, यह फाक़ों (starvation) से उकता के मर जाने वाले!! यह मज़लूम मख्लूक़ (oppressed community) गर सर उठाये , तो इंसान सब सरकशी (mischief) भूल जाए!! यह चाहें तो दुनिया को अपना बना लें ! यह आक़ाओं (masters) की हड्डियाँ तक चबा लें !! कोई इनको एहसास-ए-ज़िल्लत (feeling of insult/dishonor) दिला दे, कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे !!   --- फै ज़ अहमद फै ज़
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मैं रोना चाहता हूँ

सुकून-ओ-चैन खोना चाहता हूँ............ मैं दिल के दाग़ धोना चाहता हूँ............ '' मैं रोना चाहता हूँ, खूब रोना चाहता हूँ !!    फिर उसके बाद, गहरी नींद सोना चाहता हूँ !!''

पगली कविता

मेरी कविताएँ पगली हैं ये हैं बिल्कुल सपनीली सी ! इन में   जो    बातें    हैं    न    जी   ये    सब    हैं   ' ख़ाली - पीली ' सी !! माना ये दुनिया ज़ालिम है , और इसकी हवा ज़हरीली सी !! हैं लोग बड़े ही सर्द - मुहर , बातें उनकी बर्फ़ीली सी !! पर दुःख    के    आँसू ,  काहे को ? आँखें   मत    रक्खो    गीली    सी ! जो    होना    है    सो    होएगा आँखें   रक्खो    सपनीली    सी !! ऐसी    ही    काली काली    सी ऐसी   ही    गहरी ,  नशीली    सी !! -- जावेद '' साहिर '' 

ईद के दिन ग़मी सी लगती है !

(Remembering you Grandma on this Eid.........Missing you badly!!) फ़िज़ा ज़माने की कुछ मातमी   (melancholic)  सी लगती है ! हर एक शै   (thing)  में किसी की कमी सी लगती है ! मैं उनकी दीद   (seeing)  को तरसूँ ,  तो ईद काहे की ? मुझे   तो   ईद के दिन भी ग़मी सी लगती है ! मैं ग़म छुपाने को हर वक़्त मुस्कुराता हूँ मेरी निगाहों में फिर भी नमी सी लगती है ! ख़ुदा ही जाने मेरी ज़िन्दगी में कब हो सेहर (dawn) के मुझको हिज्र   (separation)  की हर शब्    थमी सी लगती है ! न हो जुदाई, तो फिर लज्ज़त-ए-मोहब्बत क्या?  जुदाई इश्क़ में कुछ लाज़मी सी लगती है !! जो तिश्ना - लब (parched-lip) ही रहा जू - ए - आब   (near to water)  भी ' साहिर ' मेरी मिसाल उसी आदमी सी लगती है !! --- जावेद ' साहिर '

The Confession

That you're a 'portrait of beauty' and the 'soul of beautiful gardens on the earth'; I agree! That your 'appearance is like that of the sun' and 'the youth of the heaven' you are; The 'moon's daughter', who 'descended from the revolving wheel of fortune', you are; I agree! In meeting me now, there's a chance of disrepute, I fear!! As the punishment of my own doings, I have got!! To dust, I have brought my youth; In 'flaming lamentations', I've burnt my youth; In the 'city of the beautiful', I've wasted my youth; In the 'places of dreams', I've kept it awake!! A favorable look, whenever, 'the beauty' has given; There only have surrendered 'my assertion of love'!! In a 'wild ecstasy', I was those days, A passion for 'drinking and pleasure' was in my head; A madness for loving 'the pieces of moon', I had, A craziness of having rivalry...

हर ख़ुशी में कोई कमी सी है

हर ख़ुशी में कोई कमी सी है हंसती आँखों में भी नमी सी है दिन भी चुप चाप सर झुकाए था रात की नब्ज़ भी थमी सी है किसको समझाएं किसकी बात नहीं ज़हन और दिल में फिर ठनी सी है ख़्वाब था या गुब़ार था कोई गर्द इन पलकों पे जमी सी है कह गए हम ये किससे दिल की बात शहर में एक सनसनी सी है हसरतें राख़ हो गयीं लेकिन आग अब भी कहीं दबी सी है --- जावेद अख़्तर

नसीब अपना बना ले मुझको !

[Here is a  complete version of  another  famous Ghazal  by Qateel Shifai ! Jagjeet Singh has given it his beautiful voice! It is also one of my all time favourites......]  अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको ! मैं हूँ तेरा, तू नसीब अपना बना ले मुझको ! मैं हूँ गर काँटा, तो चल मुझ से बचा कर दामन मैं हूँ गर फूल, तो जूड़े में सजा ले मुझको ! मैं 'खुले दर के किसी घर' का हूँ सामाँ   (goods) प्यारे, तू दबे  पाँव   कभी आके चुरा ले मुझको !! मैं 'समन्दर' भी हूँ, 'मोती' भी हूँ,  'ग़ोता-ज़न'  (one who dives deep) भी; कोई भी नाम मेरा लेके बुला ले मुझको ! तू ने देखा नहीं, आईने से आगे कुछ भी  ख़ुद-परस्ती   (Self-worship/praise)  में कहीं तू न गँवा ले मुझको ! तर्क-ए-उल्फ़त   (abstaining from love) की क़सम भी कोई होती है क़सम ? तू कभी याद तो कर, भूलने वाले मुझको !! मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने ? ये तेरी सादा-दिली   (plain heartedness) मार ना डाले मुझको। कल की बात औ...