यह गलियों के आवारा, बेकार कुत्ते! कि बख्शा गया (bestowed with) जिनको शौक-ए-गदाई (the art of begging)!! ज़माने की फिटकार (reprimands) सरमाया (wealth) उनका, जहाँ भर की दुत्कार उनकी कमाई!! न आराम शब् को , न राहत सवेरे , गिलाज़त ( dirt) में घर, नालियों में बसेरे! जो बिगड़ें तो एक दूसरे से लड़ा दो ! ज़रा एक रोटी का टुकड़ा दिखा दो! यह हर एक की ठोकरें खाने वाले, यह फाक़ों (starvation) से उकता के मर जाने वाले!! यह मज़लूम मख्लूक़ (oppressed community) गर सर उठाये , तो इंसान सब सरकशी (mischief) भूल जाए!! यह चाहें तो दुनिया को अपना बना लें ! यह आक़ाओं (masters) की हड्डियाँ तक चबा लें !! कोई इनको एहसास-ए-ज़िल्लत (feeling of insult/dishonor) दिला दे, कोई इनकी सोई हुई दुम हिला दे !! --- फै ज़ अहमद फै ज़
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